बूटिंग क्या है? | डेफिनेशन ,प्रकार ,कार्य और प्रक्रिया

हेलो दोस्तों नमस्कार, स्वागत है आपका आपके website पर। बूटिंग क्या है? दोस्तों, आज का हमारा टॉपिक है बूटिंग। आज के इस article में हम बूटिंग के बारे में समझने वाले हैं, जैसे कि बूटिंग किसे कहते हैं, बूटिंग कितने प्रकार की होती है, कोल्ड बूटिंग किसे कहते हैं, और वार्म बूटिंग क्या होती है। इन सभी टॉपिक्स के बारे में हम पूरी डिटेल से समझने वाले हैं। तो चलिए दोस्तों, आज के इस article को हम शुरू करते हैं।

बूटिंग क्या है ? – Booting Kya Hai

बूटिंग क्या है?
बूटिंग क्या है?

कंप्यूटर में बूटिंग एक प्रोसेस को रेफर करता है, जिसमें कंप्यूटर के पावर ऑन करने से लेकर ऑपरेटिंग सिस्टम स्टार्ट होने तक सभी प्रोसेस शामिल होते हैं। जब हम किसी कंप्यूटर को स्टार्ट करते हैं, तो इस दौरान कंप्यूटर द्वारा एक ऑटोमेटिक प्रोसेस को चलाया जाता है। इसी प्रोसेस को बूटिंग कहते हैं। बूटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे कंप्यूटर स्टार्ट होता है। कंप्यूटर में पावर ऑन होने से लेकर इसे ऑपरेट करने तक की प्रक्रिया को बूटिंग प्रोसेस कहते हैं।

कंप्यूटर के स्टार्ट होने की पूरी प्रक्रिया बूटिंग कहलाती है। बूटिंग वह प्रक्रिया है जिसमें ऑपरेटिंग सिस्टम हार्ड डिस्क से कंप्यूटर की मेमोरी यानी रैम में लोड होता है। पूरे ऑपरेटिंग सिस्टम को रैम पर लोड नहीं किया जा सकता क्योंकि रैम पर उतना स्पेस नहीं होता है। इसलिए ऑपरेटिंग सिस्टम की मुख्य फाइलों को ही रैम पर लोड किया जा सकता है जो बूटिंग के लिए आवश्यक होती हैं, जैसे command.com आदि फाइलों को ही लोड किया जाता है।

बूटिंग के प्रकार – बूटिंग क्या है?

बूटिंग दो प्रकार की होती है: कोल्ड बूटिंग और वार्म बूटिंग।

1. कोल्ड बूटिंग

जब पहले से बंद किसी कंप्यूटर को स्टार्ट किया जाता है तो उसे कोल्ड बूटिंग कहते हैं। कोल्ड बूटिंग वह बूटिंग होती है जिसमें कंप्यूटर बिल्कुल नए तरीके से स्टार्ट होता है। जब हम कंप्यूटर के पावर बटन को दबाकर कंप्यूटर को ऑन करते हैं, तो उस दौरान जो बूटिंग होती है उसे कोल्ड बूटिंग कहते हैं। कोल्ड बूटिंग तब होती है जब हम कंप्यूटर को ऑफ पोजीशन में चालू करते हैं। कोल्ड बूटिंग को हार्ड बूट या कोल्ड स्टार्ट के नाम से भी जाना जाता है।

2. वार्म बूटिंग

जब कंप्यूटर को ऑन कंडीशन में दोबारा से स्टार्ट किया जाता है तो उसे वार्म बूटिंग कहते हैं। वार्म बूटिंग तब होती है जब कंप्यूटर को रीस्टार्ट करते हैं। वार्म बूटिंग रीस्टार्ट बटन को दबाकर या कीबोर्ड से कंट्रोल + ऑल्ट + डिलीट बटन को दबाकर किया जाता है। जब हम कंप्यूटर को ऑन रहते हुए केवल रीस्टार्ट करते हैं तो उस दौरान हुई बूटिंग प्रोसेस को वार्म बूटिंग कहते हैं। वार्म बूटिंग को सॉफ्ट बूट भी कहते हैं।

बूटिंग प्रोसेस

1. POST (Power-On Self Test)

जब हम कंप्यूटर की पावर बटन को प्रेस करते हैं, तो सबसे पहले सीपीयू रोम में स्टोर इंस्ट्रक्शन को अर्थात BIOS को रीड करता है। BIOS कंप्यूटर से जुड़े सभी हार्डवेयर डिवाइस जैसे कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर आदि को चेक करता है और किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर उससे संबंधित एरर मैसेज देता है।

2. Bootloader

बूटलोडर एक प्रोग्राम होता है जो ऑपरेटिंग सिस्टम को कंप्यूटर की मेमोरी यानी रैम में लोड करता है।

3. Operating System Initialization

जब बूटलोडर ऑपरेटिंग सिस्टम को मेमोरी में लोड कर देता है, तो उसके बाद ऑपरेटिंग सिस्टम इनीशिएलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू होती है जिसमें डिवाइस ड्राइवर एवं अन्य सिस्टम कंपोनेंट को लोड किया जाता है।

4. User Authentication

ऑपरेटिंग सिस्टम के शुरू होने के बाद अगर कंप्यूटर एडमिनिस्ट्रेटर ने कंप्यूटर स्टार्ट पर कोई लॉगिन आईडी और पासवर्ड रखा है तो लॉगिन आईडी और पासवर्ड से लॉगिन होता है।

तो यह रहा दोस्तों आपका बूटिंग प्रोसेस। उम्मीद करता हूँ यहां तक आपको समझ में आ गया होगा। तो आज के लिए बस इतना ही, मिलते हैं आपसे नेक्स्ट article में एक नए टॉपिक के साथ।

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